देश के गांवों में राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे गांवों में सियासी हलचल तेज होती जा रही है। हर गली, हर चौपाल पर अब विकास, रोजगार, सड़क, पानी और शिक्षा जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो रही है।
ग्रामीण मतदाता इस बार केवल वादों से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। गांव के लोग अपने नेताओं से पिछले कार्यकाल का हिसाब मांग रहे हैं। कई जगहों पर युवा वर्ग राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और सोशल मीडिया के जरिए गांव की समस्याओं को सामने ला रहा है।
राजनीतिक दल भी गांवों पर खास फोकस कर रहे हैं। बड़े नेता लगातार ग्रामीण इलाकों का दौरा कर रहे हैं और पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। गांवों में विकास योजनाओं की घोषणाएं और पुरानी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गांव की राजनीति केवल स्थानीय नहीं रही, बल्कि इसका असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण मतदाता अब ज्यादा जागरूक हो चुके हैं और अपने वोट की ताकत को समझने लगे हैं।
कुल मिलाकर, गांव की राजनीति इस समय ट्रेंड में है और आने वाले दिनों में यह और भी ज्यादा तेज होने वाली है। पंचायत चुनाव न सिर्फ गांव की दिशा तय करेंगे, बल्कि राज्य और देश की राजनीति पर भी इसका असर साफ नजर आएगा।



