देश की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जैसे-जैसे चुनावी साल नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी दल जनता को साधने के लिए नए समीकरण बनाने में लगे हुए हैं।
पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक बयानबाज़ी में तेजी देखने को मिली है। संसद से लेकर सड़क तक, हर मंच पर मुद्दों को लेकर तीखी बहस हो रही है। महंगाई, बेरोजगारी, किसान, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय जैसे विषय एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
विपक्षी दल जहां सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में जुटा है। कई राज्यों में नए गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में कुछ बड़े राजनीतिक फैसले देश की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
इसके साथ ही सोशल मीडिया का प्रभाव भी राजनीति में लगातार बढ़ रहा है। नेता अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं। ट्वीट, वीडियो संदेश और लाइव संबोधन राजनीति का नया हथियार बन चुके हैं।
कुल मिलाकर, देश की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। आने वाले महीनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम न केवल चुनावी नतीजों को प्रभावित करेंगे, बल्कि देश की भविष्य की नीतियों की दिशा भी तय करेंगे।


